देवधारा जलप्रपात गरियाबंद

Devdhara Watarfall Mainpur

Devdhara Watarfall Mainpur ग्राम कुल्हाड़ीघाट और हीरा खदान पैलीखंड के बीचोंबीच प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर देवधारा जलाशय है। गौरतलब है कि ये जलप्रपात वनभैंसों के लिए विख्यात उदंती अभयारण्य क्षेत्र के बीहड़ों में स्थित है। देवभोग- रायपुर मुख्यमार्ग से डुमरपडाव गांव के पास से जांगडा पायलीखंड होते हुए देवदहरा पहुंचा जा सकता है। दूसरा रास्ता मैनपुर, कुल्हाड़ीघाट, बेसराझर होते हुए भी पहुंचते है। वन विभाग ने यहां पहुंचने के लिए कच्ची सड़क बनवाई है।

देवधारा दो पहाडियों के बीच इंद्रावन नदी पर है। इसके ऊपर भाई दाहरा, हाथ दाहरा, नागरशील और कई रमणीय सरोवर हैं, जहां सालोंभर पानी भरा रहता है। मैनपुर से 40 और जिला मुख्यालय गरियाबंद से 87 किलोमीटर दूर देवधारा जलप्रपात का सौंदर्य देखने लायक है। बारिश के दिनों में 60 से 70 फुट ऊंचाई से पानी जब चट्टान पर गिरता है, तो प्राकृतिक छटा देखने लायक रहती है।

देवस्थल के रूप में पहचान

देवधारा को देवस्थल के रूप में जाना जाता है। यहां दशहरा और नवरात्रि के मौके पर विशेष पूजा-अर्चना होती है। वहीं माघी पूर्णिमा के मौके पर मेला भी लगता है। यहां की पहाड़ियां घने वनों से आच्छादित है। इन वनों में साजा, बीजा, लेंडिया, हल्दु, धाओरा, आंवला, सरई एवं अमलतास जैसी प्रजातियों के वृक्ष भी पाए जाते है। पक्षियों की 12 से भी ज्यादा प्रजातियां यह पर पाई जाती हैं, जिनमें से कई प्रवासी पक्षी शामिल हैं। इनमें से कुछ हैं जंगलीमुर्गे, फेजेन्ट, बुलबुल, ड्रोंगो, कठफोड़वा आदि।