डेयरी, व्यवसायिक कृषि एवं वनोपज व्यवसायों में नये सिरे से रोजगार की सम्भावनाओं को तलाषें-कलेक्टर

कोरोना काल में युवाओं और महिलाओं के आर्थिक सषक्तिकरण के मुद्दे पर हुई समीक्षा बैठक

कोण्डागांव- कलेक्टर श्री पुष्पेन्द्र कुमार मीणा की अध्यक्षता में दिनांक 29.09.2020 को जिला कार्यालय के सभाकक्ष में युवाओं और महिलाओं के स्वरोजगार एवं आजीविका के विषय पर आवश्यक समीक्षा बैठक आहुत की गई थी। इस दौरान कलेक्टर ने उपस्थित संबंधित विभाग के अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोरोना काल में महिलाओं और युवाओं को सतत् स्वरोजगार से जोड़ने की चुनौती सभी के समक्ष है। चूंकि ऐसी परिस्थिति का प्रतिकूल असर ग्रामीण रोजगार क्षेत्र पर भी पड़ा हैं। अतः एक वृहद ग्रामीण समुदाय के आर्थिक, सामाजिक उन्नयन और उसमें भागीदारी सुनिश्चित करने में संबंधित विभागों की बड़ी भुमिका रहेगी। इसके लिए कृषि, मत्स्य, उद्यानिकी एवं वन विभाग जैसी अनुषंगिक विभागों के समन्वय से ग्रामों में रोजगार सृजन के नये उपायों पर अमल करना अपरिहार्य हो गया है। जैसा की सभी जानते हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार की गरीबी उन्मुलन एवं महिला सशक्तिकरण हेतु एक महत्वकांक्षी योजना है। इस योजना के जरिये पिछड़े क्षेत्रों में स्वरोजगार के नये तौर-तरीके एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम वरदान साबित हुए है और राज्य के अन्य जिलों में बिहान के माध्यम से महिलाओं और युवाओं ने आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाईयों को छुआ है। इसके साथ ही कोण्डागांव जिला वनोपज संग्रहण एक अग्रणी जिला कहलाता है अतः यहां महुआ, ईमली, सालबीज, हर्रा, बेहड़ा, चार जैसे परम्परागत वनोपजों के अलावा अन्य औषधीय पौधे जैसे सतावरी, मलकांगनी, तिखुर, कुसुम, अश्वगंधा के पौधों के रोपण को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा जिले की जलवायु काजु, काॅफी जैसे व्यवसायिक कृषि एवं अदरक, हल्दी जैसे मसालेदार पौधों एवं सीताफल, मुनगा, पपीता जैसे फलदार पौधों के लिए भी अनुकुल है। अतः इनके व्यवसायिक उत्पादन हेतु ग्रामीणों को जागरूक करने के अलावा इसके विपणन एवं आय के लिए भी व्यापक रणनीति बनाई जानी चाहिए। यह सच है कि निकट भविष्य में हम उद्यानिकी और व्यवसायिक फसलों में कृषि तकनीक एवं पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय के माध्यम से ही ग्रामीण रोजगार परिदृश्य को टिकाउ आधार दे सकते हैं और इसके जमीनी क्रियान्वयन बड़े पैमाने पर और एक व्यापक समुदाय को दृष्टिगत रखते हुए एवं उनको लाभांवित करने के उद्देश्य से किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए काॅफी की खेती के लिए लगभग 500 एकड़ एवं मुनगा, लीची, पपीता जैसे पौधों के लिए कम से कम 200 एकड़ पर इसका रोपण होना चाहिए। इसके अलावा मत्स्य एवं रेशम पालन भी रोजगार के अनुकुल अवसर बढ़ाने के लिए पूर्व की तरह आकर्षक संभावना वाले क्षेत्र बने हुए हैं। बैठक में कलेक्टर ने इस संबंध में सभी विभागों को एक सप्ताह के भीतर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी विभागीय अधिकारियों को दिये।

उक्त बैठक में वनमंडलाधिकारी केशकाल श्री धम्मशील गणवीर, सीईओ जिला पंचायत डीएन कश्यप सहित कृषि, पशुधन, उद्यानिकी, लाईवलीहुड काॅलेज के विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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