महिला स्व-सहायता समूह के सदस्य ‘‘बिहान’’ से जुड़कर हुए लाभान्वित

महासमुंद-  गुरू घासीदास महिला स्व-सहायता समूह का गठन वर्ष 2019 में गांव के 15 गरीब महिलाओं के द्वारा किया गया है। समूह के सभी सदस्य साप्ताहिक प्रति सदस्य 20 रूपए के हिसाब से बैंक आॅफ बड़ौदा  गढ़फूलझर में बचत खाता के माध्यम से जमा करते है। स्व-सहायता समूह की बैठक सप्ताह मे एक बार होता है। बैठक में समूह के सभी सदस्य आते है। बचत खाता में जमा राशि को घर की छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए सदस्यों को 21 रूपए प्रति माह ब्याज के दर से दिया जाता है। वर्तमान में स्व-सहायता समूह द्वारा वर्मी कम्पोस्ट खाद का निर्माण किया जा रहा है साथ ही वाशिंग पाउडर एवं साबुन निर्माण का भी प्रशिक्षण प्राप्त कर निर्माण कर रही है । वाशिंग पाउडर एवं साबुन निर्माण से उन्हें लगभग सात हजार रूपए की आमदनी हुई है। विश्वव्यापी कोरोना संकट कोविड-19 के कारण देश सहित विभिन्न स्थलों पर लाकडाउन होने के कारण कच्चा माल नहीं मिलने से वर्तमान में निर्माण कार्य में कमी आई है। इसी तरह वर्मी कम्पोस्ट खाद निर्माण से वर्तमान में स्व-सहायता समूह के पास दो क्ंिवटल खाद बिक्री के लिए उपलब्ध है। स्थानीय स्तर पर कृषकों को 80 किलो वर्मी खाद समूह के द्वारा किया गया है।
महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती देवकी बारिक एवं सचिव श्रीमती किरण रात्रे ने बताया कि समूह मे जुड़ने से सदस्यों को बहुत आर्थिक लाभ हो रहा है। जिसके कारण अपने बच्चों को पढ़ाने एवं परिवार का भरण-पोषण करने मंे आसान हुई है। वर्तमान में हमारे स्व-सहायता समूह के पास बचत बैंक खाता में 21 हजार 600 रूपए हैं साथ ही आर.एफ. फण्ड की राशि 15 हजार रूपए हैं। अब हमें पैसे की कमी महसूस नहीं होती क्योंकि हमारे बचत खाता में पर्याप्त रूपए होने के कारण जब किसी को आवश्यकता होती है तो समूह सेे प्रस्ताव पास करके राशि बैंक के माध्यम से आहरण कर समूह के सदस्यों को उपलब्ध कराया जाता है।
      उन्होंने बताया कि सी.आई.एफ. की राशि भी स्वीकृत है। जिसमें 60 हजार रूपए जमा हो गया है फिर बैंक लिंकेज के लिए तीन लाख का ऋण प्रकरण बैेेंक मे जमा हो कर स्वीकृत  हो गया है। भविष्य में हमारे स्व-सहायता समूह द्वारा वाशिंग पाउडर एवं साबुन निर्माण का कार्य और वृहद रूप से किया जाएगा। साथ ही गौठान स्थल पर सब्जी उत्पादन करने की भी योजना है। वर्तमान में हमारे एसएचजी के सभी सदस्यों के पास स्वरोजगार हो गया है। जैसे गौ पालन, बकरी पालन, सिलाई मशीन आदि। शासन की योजना बिहान से हमारे गांव छोटेपटनी की महिला एसएचजी को विशेष फायदा हुआ हंै। पहले हमारे पास आर्थिक गतिविधियाॅ कुछ नहीं थी। केवल खेती मजदूरी किया करते थे। अब हमें मजदूरी के साथ-साथ स्वयं का व्यवसाय कर आर्थिक आमदनी प्राप्त कर रहे है। इसी तरह गाॅव कीे अन्य महिलाओं केा भी स्व-सहायता समूह का गठन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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