पाटेश्वर धाम डौंडीलोहारा, बालोद

Pateshwar Dham Balod

Pateshwar Dham Balod डौंडीलोहारा ब्लॉक मुख्यालय से 21 किमी दूर पाटेश्वर धाम है। यहां प्रदेश का 108 फीट मंदिर का निर्माण 29 जनवरी 2005 से चल रहा है। मंदिर में राजस्थान के बंशी पहाड़पुर के लाल रंग के पत्थर का उपयोग हो रहा है। संत रामबालक दास महात्यागी ने बताया कि मंदिर निर्माण कार्य में 25 करोड़ खर्च आएगी। अब तक आठ करोड़ रुपए से अधिक खर्च किया जा चुका है। प्रथम तल का निर्माण पूर्ण होने के बाद दूसरे चरण का काम चल रहा है। मंदिर में पंचमुखी हनुमान की मूर्ति है।

मंदिर में 108 मूर्तियां लगाई जाएंगी, 44 लग चुकीं: मंदिर के अंदर दिवारों में अष्टवस्तु, पंचकन्या, यक्षगंधर्व, आपको 108 हिंदू देवी-देवताओं के मूर्तियां देखने को मिलेंगी। अब तक प्रथम तल में 44 मूर्ति लगाई जा चुकी है। जिसमें सर्व समाज के अलावा देश के हिंदू धर्म गुरुओं की मूर्तियां। मंदिर में उद्भुत तो यह होगा कि प्रवेश द्वार में 51 किलो की घंटी और अंदर अफसरा हवा में लटकी हुई मिलेगी। यह किसी के सहारे पर नहीं टिकी होगी।

मंदिर की तीन खास बातें

इतिहास: विरोध के बाद पाटेश्वर धाम में जानवरों की बली प्रथा खत्म हो गई

1975 में मंदिर में 12 गांवों के लोगों द्वारा जानवरों की बली दी जाती थी। संत राजयोगी बाबा ने यहां बलि प्रथा बंद करवाई। कई विरोध के बाद उन्हें सफलता मिली।

भविष्य: हिंदू धर्म की 108 देवी देवताओं की मूर्तियां देख सकेंगे लोग

मंदिर के अंदर दीवारों पर अष्टवस्तु, पंचकन्या, यक्षगंधर्व आपको 108 हिंदू देवी-देवताओं के मूर्तियां देखने को मिलेंगी। जिसमें सर्व समाज के अलावा देश के हिंदू धर्म गुरुओं की मूर्तियां स्थापित की जाएगी।

अद्भुत: मंदिर के प्रवेश द्वार में हवा में लटकी होंगे घंटा और अफसराएं

मंदिर प्रवेश द्वार में 51 किलो की घंटा और अंदर अफसराएं बिना किसी के सहारे हवा में लटकी हुई रहेगी। चुंबक के सहारे हवा में लटका रहेगा।

ऐेसे पहुंच सकते हैं पाटेश्वर धाम: पाटेश्वर धाम दल्ली, राजनांदगांव व बालोद सड़क मार्ग से जाया जा सकता है। रायपुर से राजनांदगांव रेल सफर कर डौंडीलोहारा होते हुए भी पर्यटक पहुंच सकते हैं। राजनांदगांव व बालोद से हर 15 मिनट में डौंडीलोहारा के लिए बस चलती है।

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