बस्तर के युवाओं के लिए नवाचार के नए अवसर: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

joharcg.com बस्तर के युवाओं में नवाचार की अपार संभावनाएं हैं और इन संभावनाओं का सही दिशा में उपयोग कर क्षेत्र के समग्र विकास को गति दी जा सकती है। यह बात राज्य के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने एक कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दौर नवाचार और तकनीक का है, जिसमें नए विचारों और स्टार्टअप्स के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
बस्तर जैसे क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों, संस्कृति और स्थानीय कौशल की प्रचुरता है, जिसे नवाचार के साथ जोड़कर आर्थिक प्रगति का नया मॉडल तैयार किया जा सकता है।
ओ.पी. चौधरी ने युवाओं को पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सरकार भी स्टार्टअप्स और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, जिनका लाभ उठाकर युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को सक्षम बनाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और नवाचार केंद्रों की स्थापना की जा रही है, जिससे युवाओं को अपने विचारों को साकार करने का अवसर मिल सके।
कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं ने भी अपने विचार साझा किए और क्षेत्र के विकास में योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई। वित्त मंत्री ने उनके उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर का भविष्य यहां के युवाओं के हाथ में है और उनकी ऊर्जा एवं रचनात्मकता ही क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
यह पहल न केवल युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि इससे बस्तर में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

वित्त मंत्री ने कहा कि देश की चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ते भारत में बस्तर के युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बस्तर के युवाओं को वन उत्पाद, पर्यटन, कला-संस्कृति और कृषि से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में नवाचार के साथ कार्य कर क्षेत्र के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बस्तर के युवा आर्थिक रूप से सशक्त बनकर समाज निर्माण में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर आज नई आशा और नई दिशा के साथ आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में पूना मारगेम से जुड़े साथियों की भागीदारी का स्वागत करते हुए बस्तर के विकास में सहभागी बनने की बात कही। अपने संबोधन में उन्होंने कई प्रेरणादायक उदाहरण साझा किए, जिनमें लोगों ने विपरीत परिस्थितियों से निकलकर नवाचार के माध्यम से आर्थिक प्रगति हासिल की।
श्री चौधरी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं नौकरी छोड़कर कृषि व्यवसाय अपनाया और आत्मनिर्भरता हासिल की। उन्होंने युवाओं को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि “माँ सरस्वती के उपासक बनेंगे तो माँ लक्ष्मी स्वयं साथ आएंगी”, आज का युग ज्ञान आधारित है, इसलिए युवाओं को अपनी क्षमता और कौशल का निरंतर विकास करना चाहिए।
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