वन भूमि पर मिले अधिकारों से बीजापुर के वनवासियों का संवर रहा जीवन

व्यक्तिगत, सामुदायिक एवं वन संसाधन के अधिकारों ने दिलाया जल-जंगल-जमीन पर हक

रायपुर : वन अधिकार कानून के तहत वन भूमि पर मिले व्यक्तिगत, सामुदायिक तथा वन संसाधन के अधिकारों से बीजापुर जिले के वनवासियों का जीवन संवर रहा है। व्यक्तिगत अधिकार पत्रों के माध्यम से न केवल वे वनभूमि पर बेखौफ खेती कर पा रहे हैं, बल्कि आवास, पशुपालन और कृषि संबंधी योजनाओं का भी लाभ उठा रहे हैं। ग्राम सभाओं के माध्यम से मिले सामुदायिक अधिकारों से वे अब वनों के गौण उत्पादों, चारागाहों, जलाशयों, जैव विविधता एवं अपने पारंपरिक ज्ञान का उपयोग अपने सामुदायिक जीवनस्तर को ऊंचा उठाने के लिए कर पा रहे हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ शासन ने वन अधिकार कानून में अब तक उपेक्षित किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण वन संसाधन के अधिकार के प्रावधान को भी जिले में प्राथमिकता के साथ लागू किया है। इससे उन्हें जल-जंगल-जमीन के संपूर्ण संरक्षण, प्रबंधन और पुनर्जीवन का अधिकार मिल गया है।  

 मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर वन अधिकार कानून के तहत छत्तीसगढ़ में वनभूमि पर 13 दिसंबर 2005 के पूर्व से काबिज वनवासियों को वन-अधिकार-पत्रों का वितरण किया जा रहा है। वन अधिकार पत्र धारक वनवासी अपने अधिकार-वाली भूमि का उपयोग कृषि, बाड़ी, आवास अथवा जीवन यापन संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कर पा रहे हैं। जिले में कुल 9 हजार 617 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्रों का वितरण किया गया है। इनमें से 2179 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र दिसंबर 2018 के बाद से अब तक प्रदान किए गए हैं। व्यक्तिगत वनअधिकार पत्रों के माध्यम से यहां के वनवासियों को 13062.20 हेक्टेयर वनभूमि पर अधिकार प्राप्त हुआ है। इस तरह प्रति परिवार औसतन 1.35 हेक्टेयर भूमि का अधिकार प्राप्त हुआ है। इसी तरह 2243 सामुदायिक वन अधिकार पत्रों का वितरण ग्राम सभाओं को किया गया है। सामुदायिक वन अधिकार पत्रों के तहत गौण वन उत्पाद, जलाशय, चारागाह, जैव विविधता, वनवासियों के पारंपरिक ज्ञान इत्यादि से संबंधित अधिकार समुदायों को प्राप्त हुए हैं। इससे 62518 हेक्टेयर भूमि का अधिकार ग्राम सभाओं के माध्यम से समुदाय को मिला है।

 वन अधिकार कानून में अब तक उपेक्षित महत्वपूर्ण प्रावधान वन संसाधन के अधिकार को प्राथमिकता के साथ लागू करते हुए जिले में 283 वन संसाधन के अधिकार प्रदान किए गए हैं। पूर्ववर्ती वर्षों में सामुदायिक वन संसाधन का कोई भी अधिकार वनवासी समुदाय या ग्राम सभाओं को प्रदाय नहीं किया गया था। राज्य सरकार द्वारा मूल निवासियों को उनके जल, जंगल, जमीन के संपूर्ण प्रबंधन, संरक्षण, पुनर्जीवन हेतु संपूर्ण अधिकार पहली बार प्रदान किए गए। जिले में समुदाय को ग्राम सभाओं के माध्यम से मिले 283 सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार के तहत 1,91,550.152 हेक्टेयर वन भूमि सौंपी गई है। इस अधिकार के तहत वनों के संपूर्ण प्रबंधन, उपयोग एवं संरक्षण का अधिकार वनवासी समुदाय को प्राप्त हो गया है। 

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