छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में ही झीरम नरसंहार हुआ था, जिसमें प्रदेश कांग्रेसके टॉप लीडर समेत 29 लोगों की मौतहुई थी। लेकिन अब बस्तर जिले के ही चित्रकोट विधानसभा उपचुनाव में सबसे बड़ी समस्या नक्सल ही राजनीतिक पार्टियों के वायदों गायब होती जा रही है

रायपुर । छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में ही झीरम नरसंहार हुआ था, जिसमें प्रदेश कांग्रेसके टॉप लीडर समेत 29 लोगों की मौतहुई थी। लेकिन अब बस्तर जिले के ही चित्रकोट विधानसभा उपचुनाव  में सबसे बड़ी समस्या नक्सल ही राजनीतिक पार्टियों के वायदों गायब होती जा रही है. इतना ही नहीं चुनाव प्रचार के एजेंडे में भी पार्टियां नक्सल समस्या पर फोकस नहीं कर रही हैं। चित्रकोट उपचुनाव के तहत 21 अक्टूबर को वोटिंग होनी है।

सूबे की बस्तर जिले के उस चित्रकोट विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है, जिस बस्तर जिले में झीरमकांड मई 2013 में हुआ था। इसमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केन्द्रीय मंत्री समेत 29 लोगों को नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया था. इस उपचुनाव में नक्सल समस्या को लेकर बीजेपी ने सत्तारुढ़ पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा है कि जब कांग्रेस की जेब में ही झीरमकांड के सबूत हैं तो वो जांच एजेसियों को क्यों नहीं दे रही है. बीजेपी नक्सल समस्या को लेकर शुरू से ही संजिदा रही है।

जोगी कांग्रेस के नेता इकबाल रिजवी का कहना है कि झीरमकांड को तो कांग्रेस भूल गई है. चित्रकोट की जनता इस बार इस तरह के मुद्दों को भूल कर जोगी कांग्रेस की पार्टी के नेता पर मोहर लगाएगी. झीरम के मामले में कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विकास तिवारी ने बीजेपी पर हमला बोला है. विकास का कहना है कि केन्द्र की मोदी सरकार एनआईए की फाइल दे दे तो हमारी सरकार जांच कर लेगी. हालांकि चित्रकोट उपचुनाव में नक्सल समस्या को प्रमुख एजेंडे में शामिल नहीं करने को लेकर गोलमोल जवाब ही देते नजर आए.

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