राज्योत्सव में लोककला के रंग, सुरों की गूंज और थिरकते कदमों ने बांधा समां

joharcg.com रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 की सांस्कृतिक संध्या लोककला, संगीत और नृत्य के अनूठे संगम से यादगार बन गई। नवा रायपुर में आयोजित इस समारोह में कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। पारंपरिक लोकनृत्यों की थाप, सुरीले गीतों की गूंज और कलाकारों के थिरकते कदमों ने पूरे आयोजन स्थल को उत्साह और उमंग से भर दिया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ देश की विविध लोककलाओं की झलक भी देखने को मिली।
सांस्कृतिक संध्या में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। परिवारों, युवाओं और कला प्रेमियों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठता था। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ समृद्ध लोकसंस्कृति और कला परंपराओं से भी है।
लोकनृत्यों की थाप पर झूमे दर्शक
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकनृत्यों ने विशेष आकर्षण पैदा किया। पंथी, राउत नाचा, सुआ और कर्मा जैसी लोकनृत्य शैलियों ने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मंच पर जीवंत कर दिया।
पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने शानदार तालमेल और ऊर्जा के साथ अपनी प्रस्तुतियां दीं। लोकवाद्यों की धुन और नृत्य की लय ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की ग्रामीण एवं जनजातीय संस्कृति से रूबरू कराया।
इन प्रस्तुतियों में प्रदेश की परंपराओं, सामाजिक एकता और सामूहिक जीवनशैली की सुंदर झलक दिखाई दी। दर्शकों ने भी कलाकारों का उत्साह बढ़ाते हुए खूब तालियां बजाईं।
सुरों की गूंज ने बनाया माहौल यादगार
सांस्कृतिक कार्यक्रम में गीत-संगीत की प्रस्तुतियों ने भी समां बांध दिया। कलाकारों की सुरीली आवाजों और मधुर संगीत ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकगीतों के साथ आधुनिक संगीत की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में विविधता का रंग भर दिया।
संगीत की अलग-अलग शैलियों ने हर आयु वर्ग के दर्शकों को आकर्षित किया। जहां पारंपरिक गीतों ने लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़ा, वहीं आधुनिक संगीत की धुनों ने युवाओं में खास उत्साह पैदा किया।
छत्तीसगढ़ की कला और परंपराओं को मिला मंच
राज्योत्सव का उद्देश्य केवल राज्य स्थापना दिवस मनाना नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, उपलब्धियों और विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाना भी है। इस तरह के आयोजन स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करते हैं।
छत्तीसगढ़ की पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुआ और करमा जैसी लोककलाएं प्रदेश की पहचान हैं। इन कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और कलाकारों को प्रोत्साहित करना सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने की पहल
आज के बदलते दौर में पारंपरिक लोककलाओं को संरक्षित रखना बेहद जरूरी है। राज्योत्सव जैसे बड़े आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने और उनसे जुड़ने का अवसर देते हैं। साथ ही कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन के लिए बड़ा मंच मिलता है।
सांस्कृतिक संध्या में लोककला के रंग, सुरों की मिठास और नृत्य की ऊर्जा ने पूरे आयोजन को खास बना दिया। यह शाम दर्शकों के लिए मनोरंजन के साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं को करीब से जानने का यादगार अवसर भी साबित हुई।
छत्तीसगढ़ की हर बड़ी खबर सीधे WhatsApp पर!
हमारे आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल से जुड़ें और रहें सबसे पहले अपडेटेड।